सोमवार, 21 सितंबर 2009

तेरी यादो के दिए दिल में जलाये रखे हैं,
तेरी आने की आस में राहों पे फूल बिछाये रखें हैं,

हर एक आहट पे दरवाजे पे जाना मुमकिन नहीं,
इसलिए हर दरवाजे पे एक नजर जमाये रखे है,

कदम उठते ही तेरे आशियाँ की तरफ़ बढ़ता है ये "गोविन्द"
जमाना मुझे दीवाना न कहे, इसलिए ख़ुद को सबसे छिपाए रखे है॥

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1 टिप्पणियाँ:

यहां 13 अक्टूबर 2009 को 6:26 am बजे, Blogger Amit K Sagar ने कहा…

गोविन्द जी,
आपने बहुत अच्चे से भावनाओं को अंकित किया है.
और भी बेहतर लिखें, शुभकामनायें.
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हिंदी ब्लोग्स में पहली बार Friends With Benefits - रिश्तों की एक नई तान (FWB) [बहस] [उल्टा तीर]

 

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