शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009

वो हमसे रूठ गये


अब दमन फूलो से चुराता हूँ, वो हमसे रूठ गए
खो गयी बहार, खामोशी – ऐ – गुल के
दुनिया – ऐ – खुश बे मजाक, मस्ती तिश्नगी के
गमो से हर चाँद रहा अपना नाता
अब दमन फूलो से भी चुराता, वो हमसे रूठ गए

जख्म गहरे हुए जाते हैं, और भी दिल के
वक्त खवाबो में गंवाया है तिल – तिल के,
देखि नहीं मोह्हब्बत बेवफा – ऐ – दिल से
सोचा था अब प्यास बुझे, प्याले जहर से
बेवफा हुई जहर, जब हम पी गए
दुनिया हुई शमशान, वो हमसे रूठ गये

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