बुधवार, 22 अप्रैल 2009

तकल्लुफ


तकल्लुफ न कर, इंकार कर दे
प्यार अगर हो तो, इज़हार कर दे
तुम्हारी हाँ पर लड़ सकता हूँ लोगो से,
बस साथी, साथ साथ निभाने का करार करदे
मैं भी बहता चला जाऊं, तुम्हारी धार पे
कुछ देर कहीं, निर्मल छहों में तृप्त करदे
तकल्लुफ न कर, इंकार करदे
प्यार अगर हो तो, इज़हार कर दे

क्या तुमसे पूछूँ और क्या बतलाऊँ
क्या दिल में रही, जब तुमको चाहा
मैं कितना भी भूलूँ, रात याद तुम्हारी आएगी
मुझको अपनी हाथो का लकीर कर दे,
तकल्लुफ न कर, इंकार करदे
प्यार अगर हो तो, इज़हार कर दे

1 टिप्पणियाँ:

यहां 29 अप्रैल 2009 को 4:25 am बजे, Anonymous बेनामी ने कहा…

Ishq wo dariya hai jiska sahil nahi hota, har dil mohabbat ke kabil nahi hota, rota to wo v hai jo duba ishq ke samandar me, rota wo v hai jise ishq haasil nahi hota.
Aapke pyar ko salaam - Bikash

 

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