कही पढ़ा था की कवि हमेशा अकेले हो जाते है ... विषय पे सोचा तो पता चला सभी अकेले ही है ---
अकेले पन की सजा अक्सर हमने पाई है
अकेले पन ने ही हमको ग़लिब की ग़ज़ल सुनाई है
लोग अकेले है इस दुनिया में…
जब तक एक मानव से दुसरे मानव की लडाई है
हाँ कवि के साथ अकेलेपन का रिश्ता बहुत पुराना है॥ कवि अकेले ही कुछ लिख पता है॥ किसी के लिए हमारा लिखना पागलपन है॥ तो कोई इसे अपने टाइम पास के लिए पढ़ लेता, हमारी संवेदना अगर किसी तक पहुँचती हो तो, हम अपनी रचना को अमर मान ले, बस हम अपनी सोच को शब्दों में डालते है,,, सारे लोगो को पसंद नहीं आता॥ पर जिसके साथ गुजरी हो वो तो जरुर भावुक हो जाएगा..... कवि हमेशा अकेला होता है... और एकांत उसका हमसफ़र.... मैं भी अकेला हूँ, पर तब जब मैं कुछ लिखता हूँ... वरना परिवार मेरा भी है॥
भ्रष्टाचार के भीड़ में , कभी दर्द तो कभी प्रेम
और हँसी से सु सज्जित शब्द बरसाने वाले
हम कवि अकेले हो जाते है॥
इसलिए के इस माडर्न युग में चलते हुए लोगो
को हम कभी रास नहीं आते ...
समाज से हम हमेशा जूझते ॥
पर किसी की यकीं जीत न पते
इसलिए कवि हमेशा अकेले हो जाते
आपका - गोविन्द शर्मा
लेबल: अकेले

1 टिप्पणियाँ:
Aap bhale hi likhte waqt akele the lekin ab hum saath hain dost.
Dil cheer sakte ho aap kisi kambakht ka.
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