शुक्रवार, 22 जनवरी 2010

मैं शायर हो गया

इश्क में कुछ यूँ मैं जैसे पागल हो गया
रोया ऐसे अकेले में की सागर हो गया

मेरे ज़ख्मो पे नमक लगाने वो कभी तो आएगी
आज बिना किसी हादसों के ही मैं घायल हो गया

अब और रोया तो ज़माना रोयेगा मेरे साथ
सारे दास्तान में अव्वल मेरे फ़साना हो गया

वो आएगी मेरी आगोश में किसी न किसी शब् को
इसी इंतज़ार में “गोविन्द” खोया तो शायर हो गया

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1 टिप्पणियाँ:

यहां 26 जनवरी 2010 को 9:21 pm बजे, Blogger Kuldeep Saini ने कहा…

bahut sundar rachna

 

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