मैं शायर हो गया
इश्क में कुछ यूँ मैं जैसे पागल हो गया
रोया ऐसे अकेले में की सागर हो गया
मेरे ज़ख्मो पे नमक लगाने वो कभी तो आएगी
आज बिना किसी हादसों के ही मैं घायल हो गया
अब और रोया तो ज़माना रोयेगा मेरे साथ
सारे दास्तान में अव्वल मेरे फ़साना हो गया
वो आएगी मेरी आगोश में किसी न किसी शब् को
इसी इंतज़ार में “गोविन्द” खोया तो शायर हो गया
लेबल: ghazal

1 टिप्पणियाँ:
bahut sundar rachna
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