सोमवार, 21 सितम्बर 2009

जिधर देखूं तेरी तस्वीर नज़र आती है,
तेरी सूरत मेरी तकदीर नज़र आती है,
जीता हूँ मैं तेरे लिए, जीवन तेरा है॥
मेरी खुशियों की तू जागीर नज़र आती है,
और कुछ अब याद रहता नहीं,, एक तुम्हारे सिवा...
हाथो में तेरी ही लकीर नज़र आती है... !!

1 टिप्पणियाँ:

Yogesh ने कहा…

Bahut Sundar...
kyaa bat hai Govind...
Lajawaab...