सोमवार, 21 सितंबर 2009

जिधर देखूं तेरी तस्वीर नज़र आती है,
तेरी सूरत मेरी तकदीर नज़र आती है,
जीता हूँ मैं तेरे लिए, जीवन तेरा है॥
मेरी खुशियों की तू जागीर नज़र आती है,
और कुछ अब याद रहता नहीं,, एक तुम्हारे सिवा...
हाथो में तेरी ही लकीर नज़र आती है... !!

लेबल:

1 टिप्पणियाँ:

यहां 29 सितंबर 2009 को 8:27 pm बजे, Blogger Yogi ने कहा…

Bahut Sundar...
kyaa bat hai Govind...
Lajawaab...

 

एक टिप्पणी भेजें

सदस्यता लें टिप्पणियाँ भेजें [Atom]

<< मुख्यपृष्ठ