गुरुवार, 26 नवंबर 2009

मांग सितारों से भर दूंगा

प्रिये, तुम कदम बढ़ाना , सारे कांटे मैं सह लूँगा,
अंग तुम्हारे सारी खुशियाँ, मांग सितारों से भर दूंगा
तकलीफे और बेरुखी ये तेरा श्रृंगार नहीं,
हर तकलीफों की राहों में, संग तुम्हारे चलता रहूँगा,
जब भी दर्द तेरी आँहों में आए,
अपनी खुशियों से भरता रहूँगा,
जब कभी अँधेरा हो जाए, मुझे आवाज़ देना,
रात भर चिराग बन जलता रहूँगा,

प्रिये, तुम कदम बढ़ाना , सारे कांटे मैं सह लूँगा,
अंग तुम्हारे सारी खुशियाँ, मांग सितारों से भर दूंगा

1 टिप्पणियाँ:

यहां 7 दिसंबर 2009 को 10:04 pm बजे, Blogger abha ने कहा…

वाह, बड़ी ही अच्छी और सुन्दर रचना | उम्मीद यही है की ये सब तुम पूरा कर सको | और मेरी सुभकामनाये भी |

 

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