अपने दर्द, अपने एहसास और अपने ख्वाब को पन्नो पे लिखता हूँ,
ज़माना कहने लगा ….. लो !! गोविन्द कवि हो गया !!
सोमवार, 21 सितम्बर 2009
प्यार है तुझसे प्यार ही रहने दो, मेरे सुख हो तेरे, दुःख भी सहने दो, नम आंखों से दिल को रोने दो, एक हो जाए सदा के लिए.... कभी याद आओ तो कभी पास आओ... मुझे दिल से कभी न सताओ... मेरे पास आओ फिर कभी न जाओ... !!
1 टिप्पणियाँ:
lagta hai koi dhokha diya bhai kavi ban gaye, kavitayen to kafi acchi hai,lekin ye kavita kiski yad me likha gaya ????????
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