आज फिर जिंदगी से किया एक वादा तोड़ जाऊंगा
गर शराब न पिया तो शायद मर जाऊँगा
न करो मेरी फिक्र ऐ दुनिया वालो
हवा का झोंका हूँ , न ठहरा है न ठहर जाऊंगा
मुसाफिर हूँ मैं भी इस दमकती दुनिया का
जिधर ले जाये भीड़ मैं वही चला जाऊंगा
मेरी पहचान भी मेरे जाने के बाद ही निखरेंगी
अलविदा कहते कहते अपनी शायरी दे जाऊंगा..!

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