इश्क छुपाया न जाएगा
इश्क छुपाया न जाएगा
तेरी भीगी याद, अब अपने दिल से भुलाया न जाएगा
मेरे जैसा आशिक, अब इस सहर में पाया न जाएगा
मेरा इश्क कैसा है सब पूछेंगे सवाल तुमसे
तुझसे मेरा नज़राना - ए - इश्क बताया न जायेगा
सिर्फ मैं जानता हूँ क्या है हाल-ए-दिल मेरा,
ये दर्द किसी और को सुनाया न जायेगा,
हाँ, इतना कह सकता है ये दीवाना तेरा
कि ये कमबख्त इश्क अब हमसे निभाया न जायेगा.

2 टिप्पणियाँ:
आदतन तुमने वादे किया, आदतन हमने ऐतबार किया
तेरी राहों में बार बार रुक कर हमने अपना ही इन्तेजार किया
अब न मांगेंगे ये जिंदगी या रब, ये गुनाह हमने एक बार किया
मेरी नहीं है गुलजर साहब की है, उम्मीद है तुम्हे पसंद आएगी
आभा दीदी .... टिपण्णी के लिए बहुत बहुत धन्यावाद... गुलज़ार साहब की लिखी हुई ये पंक्तियाँ मुझे बहुत ही पसंद आई, .... आशा करता हु इस तरह की सुन्दर रचना आप मुझे भेजते रहे...
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