मयकदो में आ के देखना
कभी ग़म को सिने से भुला कर देखना
मयकदो में आओ तो मुझे बुला कर देखना
सालो हुआ किसी को ग़म सुनाये हुए
इस शहर – ऐ- ग़म में कभी आ के देखना
उनकी एक बेवफाई ने मयकदो की राह दिखा दी,
पर अब भी कहते है राहे वफ़ा आजमा के देखना
थे हम ही नादान महफिल-ऐ-वफ़ा में
बाज़ार लुटा मेरा, ज़रा वीरान – ऐ – बाज़ार देखना
दूर हो जायेंगे तेरे नज़रो से एक मर्तबा बोल तो ज़रा
जियेगा फिर भी “गोविन्द” बेवफाई में आ कर देखना
मयकदो में आओ तो मुझे बुला कर देखना
सालो हुआ किसी को ग़म सुनाये हुए
इस शहर – ऐ- ग़म में कभी आ के देखना
उनकी एक बेवफाई ने मयकदो की राह दिखा दी,
पर अब भी कहते है राहे वफ़ा आजमा के देखना
थे हम ही नादान महफिल-ऐ-वफ़ा में
बाज़ार लुटा मेरा, ज़रा वीरान – ऐ – बाज़ार देखना
दूर हो जायेंगे तेरे नज़रो से एक मर्तबा बोल तो ज़रा
जियेगा फिर भी “गोविन्द” बेवफाई में आ कर देखना
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1 टिप्पणियाँ:
kabile tarif rachna .......govind jee thankyou
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