मंगलवार, 20 अक्टूबर 2009

उगा हो सूरज देव ..अर्घ के बेर


सूर्य उर्जा का सबसे बड़ा श्रोत है। इस कारन हम हिंदू सूर्य को भगवान मानते है। छठ, सूर्य href="http://hi.wikipedia.org/wiki/सूर्य">सूर्य की उपासना का पर्व है। वैसे भारत में सूर्य पूजा की परम्परा वैदिक काल से ही रही है। लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की और सप्तमी को सूर्योदय के समय अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशिर्वाद प्राप्त किया। इसी के उपलक्ष्य में छठ पूजा की जाती है। (श्रोत - विकेपेडिया)

इसी उपलक्ष्य पर मैंने भी ह्रदय से कुछ लिखना चाह है॥ कृपया देखें: -

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गंगा का तीर, व्रतियों की भीड़,

हाथो में पावन सूप और गंगे में ईंख


उगा हो सूरज देव ..अर्घ के बेर


आस्था मेरी अब खाली न जाए,

राउर पवन करुना अब हमार घर आए,

कईले बनी जो मन्नत सबकी,

इस बरस अब पुरी हो जाए।


उगा हो सूरज देव ॥अर्घ के बेर


ठेकुआ से सजल सुप्वा, दिए से जगमग किनरवा,

कितने आस से आईल बनी जा,

कितने मन्नत दिलवा में सजयिल बनी जा,

कोई आईल बा भरे खातिर गोदिया हो,

अब तो गूंजे लागल नदिया में गीत्वा हो,


उगा हो सूरज देव ॥अर्घ के बेर


अगले साल भी आयिब पूजे,

ले के नई सुप्वा हो.....

उगा हो सूरज देव ..अर्घ के बेर ......उगा हो सूरज देव ..अर्घ के बेर




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