सोमवार, 18 अक्टूबर 2010

अंतर्भावना

मैं तुम्हे अपने रुमाल पे फूलो की तरह लपेट के रखना चाहता हूँ जैसे किसी मंदिर में पूजा के फूल दिए जाते है आँचल के कोने में बांधने के लिए, जो हमारे जीवन में एक आशीर्वाद की तरह साथ होता है, और ऐसा करके मैं तुम्हे आजीवन आशीर्वाद की तरह पाना चाहता हूँ, मेरा साथ दोगी न ?

--- गोविन्द शर्मा

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1 टिप्पणियाँ:

यहां 22 अक्टूबर 2010 को 4:23 am बजे, Blogger Main shayar badnaam ने कहा…

hey Govind

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