मेरे लिए भावः ही सर्वोच्च सिद्धांत है. येही सत्य है जो हर प्राणी के ह्रदय से सीधे निकलता है.मैं अपनी भावनाओ को कभी नहीं समेटता.उन्मुक्त रहने देता हूँ.. आख़िर भावुक लोग ही किसी की संवेदना समझते है. मेरा विश्वास है की अगर आप कुछ अपने लिए नहीं करने के बजाय किसी और के लिए करे तो उस से किसी व्यक्ति की ही नहीं अपितु दुनिया को भी हानि से बचाया जा सकता है. मैं अपने जीवन में इश्वर की दया हमेशा मानता हूँ.इसलिए तो आज भी मन्दिर को देखते ही सर स्वतः ही झुक जाते हैं. घुमने का शौक काफी ज्यादा है… किसी अनजान सेहर की राहों में अकेला चलना पसंद है तो कभी रातों को बिना वजह जागना.
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