सोमवार, 28 जून 2010

तुम क्यों नहीं होती मेरे साथ,
जब जब तुम्हारी जरुरत पड़ती है
तुम क्यों नहीं होती मेरे साथ,
पल पल
आती जाती सांसें
जो तुम्हारा नाम लेती है,
यूँ ही तो नहीं ? ? ?

मेरे मन में कपट नहीं होता,
क्या तुमने देखा नहीं था,
मेरा चेहरा,
मेरी मासूम सी आँखों में सुर्ख आंसू,
जब motorcycle में बैठ तुम मुझसे
दूर जा रही थी,
उसी समय तो बिना कहे चुपके से आंसू छलक गए थे,
क्या तुमने देखा नहीं था ?
या फिर एहसास नहीं तुमको ?
तुम ही कहो न,
क्यों जाती तुम मुझे छोड़कर .... जाती तो हो पर मेरे रोने पे भी क्यों नहीं आती,
प्रेम का मतलब केवल रोना ही तो नहीं होता न,
अगर मैं रो के बुला सकता हूँ तो तुम क्यों नहीं आ सकती,
क्या मुझे रोता देखना तुम्हे अच्छा लगता है॥

बहुत अकेला हूँ तुम्हारे बिना,
क्या तुमको समझ नहीं,
आज ऐसा दिन है की, मेरे आँख भी मुझपे रो रहे है,
क्या मेरी गीद गीदाहत , का कोई असर नहीं होता तुमपे,
पर ये बनावती नहीं है, मैं बदल जाऊंगा,
देखना अब मेरी ख़ामोशी, अब लब्ज़ डरते है लबो पे आने से,
क्योंकि उन्हें वो प्यार नहीं मिलता,

फिर वही दिन शायद कभी न लौटे,
वही गर्म सुबह और तीखी मीठी धुप,
ये दिन शायद अब ऐसे न रहे
क्योंकि मेरी मिठास अब कम हो गयी है,
पानी की यही खासियत है, हर रंग में ढल जाता है,
मैं भी ढल गया था, तुम्हारे रंग में,
इसलिए अब अपना अस्तित्व धुंडने में तकलीफ होती है मुझे,

ख्वाब और हकीकत में,
फर्क बस इतना होता है,
ख्वाब अपना होता है, और हकीकत परायी,

अच्छा होता मेरे आंसू, मेरे ख्वाब नहीं होते,
वो ख्वाब जो तुमसे जुड़ा है,
वो हकीकत भी तुम ही से जुडी है,
अगर आ पो तो जल्दी आ जाना,
वरना मेरी नसीब ही है, अकेले में जल जाना।

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