मंगलवार, 18 मई 2021

रोना नही , उजियारा अभी बाकी है।

रोना नही , उजियारा अभी बाकी है।

शहर बन्द है, बन्द है दुकाने
पर दिल के किसी कोने मे आशा बाकी है
तू रोना मत मेरे दोस्त, उजियारा अभी बाकी है।
उस पल को याद करना, दोस्तो का झुंड चौराहे पे,
चाय की टपरि पे खिल्खिलाहटो का माहौल,
दोस्तो को मिलने के लिये, भीन्च्ज जता है मन
बुजुर्ग कहते है, देश को किसी की बुरी नजर लग गयी है
पर हमे जीना है अपने लिये, अपनो के लिये,
इस डर के बाद जीत अभी बाकी है,
तू रोना मत मेरे दोस्त, उजियारा अभी बाकी है।

मैं तो एक अश्के - नदामत के सिवा कुछ भी नहीं 
तुम अगर चाहो तो पलकों में छुपा लो मुझको 

-- मोमिन 

चैतन्य

जब बारिश की बूंदें निकल जाएं बिना भिगोये तुम्हे 
जब धुप भी शरीर को जलाने में असमर्थ हो
जब मंजिल को पाने की इच्छा न हो और न खोने का डर
और ना हो कोई भावनाओ का ढेर जो कमजोर बनाती हो तुम्हे,
तब मान लेना तुम हो नहीं, कहीं नहीं, बस चैतन्य है, चैतन्य ही है।  


जब पंक्षियों की गूंज कान को छू ना पाए 
जब शर्द हवाएं भी बे असर लगे
जब लगे की अब कोई नहीं उस पार, जो राह तेरा देखता है
तब मान लेना तुम हो नहीं, कहीं नहीं, बस चैतन्य है, चैतन्य ही है।  


शून्यता का चरम पा लिया है तुमने
कुछ और शेष नहीं, सब पा लिया है तुमने
जब संसार का मोह ना लगे और तुम निकल आओ सब से परे
तब मान लेना तुम हो नहीं, कहीं नहीं, बस चैतन्य है, चैतन्य ही है।