शुक्रवार, 24 जनवरी 2025

वो तुम्हारा गुलाबी दुपट्टा

वो  तुम्हारा  गुलाबी  दुपट्टा 

चुप चाप चला आता है, हमारे बीच


उस दिन हम साथ थे, और साथ था वो तुम्हारा गुलाबी दुपट्टा

ठंडी सी हवा देह में लिपटी थी, 

बहुत देर हम चुप चाप खड़े थे

न तुमने कुछ कहा, न मैं ही कह पाया

राज़ अपने दिलो के न तुझको बता पाया


सर्द रातो के ख्वाबो में आती रहती हो तुम

जैसे बारिश के दिनों में मोर आ जाती है सड़को पे

एक ख्वाब ही हो तुम, जो आती है ओढ़े गुलाबी दुपटा


वो  तुम्हारा गुलाबी दुपटा, चुप चाप चला आता है हमारे बीच