रह पाऊँ कैसे ?
किसी और को अपना दर्द बताऊँ कैसे
अपनी आँखों से आंसू छुपाऊँ कैसे
मैं तो तनहा हूँ तेरे बगैर इतना
यूँ ही रहे तो रह पाऊँ कैसे ?
सोचता हूँ की बंद कर दूँ नैनो को अपनी
पूरी रात आंसुओं से इसको भीगाऊँ कैसे
और, सुबह उठे तो हाथ खुदा के लिए उठे
अब तेरे सजदे में सर झुकाऊँ कैसे ?
अपनी मर्ज़ी के मालिक तुम कब सुनोगी मेरा,
अपनी बातो को कहकर खुद दिल दुखाऊँ कैसे
चली आओ की साँस टूटती है मेरी,
बिन तेरे अब साँस भी ले पाऊँ कैसे ?
लेबल: तनहा
