मंगलवार, 12 मई 2009

तू कोई और नहीं, मेरा अभिमान है

तू कोई और नहीं, मेरा अभिमान है

मुख पर ढँक लेती हो आँचल
जैसे डूब रहा हो, शाम का बदल
या दिन भर उड़कर थकी कोयल…
सो जाती है पंख समेटे
मेरे चित्त से तेरे मन तक जो पहुंचे, मेरा गान है
तू कोई और नहीं, मेरा अभिमान है


सूर्य की किरने साँझ में जैसे लहराए
मिसरी की आवाज़ सा मीठा कोई गीत सुनाये
प्रेम रस से जैसे धुल के , खिलते तुम्हारे खुले बाल
अमृत के पवन द्रव से धुले हुए गाल
मेरे पूजन आराधन में, बस तेरा अरमान है
तू कोई और नहीं, मेरा अभिमान है

बच्चो की जिद्द सा तेरा मन
पवन, चितवन तेरा तन
तुम क्या जानो. घर का आँगन सुना है
कर लेने दो याद, तुही मेरा सम्मान है
तू कोई और नहीं मेरा अभिमान है

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