गुरुवार, 16 जुलाई 2009

साये

तेरे ख्यालो के साये, तेरे सवालो के साये
नज़रें बेजार, बेरुख नजारो के साये

अभी जिंदा हूँ की मेल बाकी है अपना
वरना जिंदगी के चारो और गुनाहों के साये

नहीं लगता अब मन, बिन सुने आवाज़ तेरे
वो मीठी आवाज़ में पूछना तुम्हारे सवालो के साये

मैं तो उलझा हूँ जिंदगी के चौराहे पे,
मोड़ दिखाते तेरे दख्त और राहों के साये

टूट जाए एक हरक़त से ये दिल “गोविन्द”
बचा के रखा है इन्हे , तेरी यादो के साये..

मंगलवार, 7 जुलाई 2009

नींद उदा के मेरी तू भी चैन से सो न पाती है
जब सोचती हो नाम मेरा तू भी बेचैन हो जाती है

हर सुकून धुल जाता है अश्क के बहने से
इस जुदाई के दर्द से अब तू भी कहाँ बच पाती है

मैं तो ग़मो से बोझिल, जब भी देखता हूँ तस्वीर तेरी
उनमे तुम भी हो और तुम्हरी जुस्त जू भी नज़र आती है

ख़ुद को खोजता हूँ अपने ही भीतर, न जाने कहाँ खो गया हूँ मैं
अब “गोविन्द” आइना भी देखे तो तेरी सूरत ही नज़र आती है.