गुरुवार, 26 नवंबर 2009

आँखों आँखों में मोहब्बत बयाँ हो

कभी मायूसी लगती है, कभी तन्हाई लगती है,
तेरे बिन जिंदगी भी बेवफाई लगती है,

रुक रुक कर बहना, कभी घनघोर बरसना
अपनी आँखे भी अब तो परायी लगती है,

तपते जलते राहों में, कदम कदम खिसकना,
सजा - ऐ - इश्क, अब ताउम्र बे रिहाई लगती है,

बोझिल सी आँखे और चुभता खालीपन,
सांसे है रूकती रूकती, हर एक मोड़ रुसवाई लगती है,

"गोविन्द" ऐतबार ही किया था और कुछ नहीं,
फ़िर आज मेरी वफ़ा क्यों, दुहाई लगती है.

आँखों आँखों में मोहब्बत बयाँ हो


नजरे कहे जुबां चुप रहे,

आँखों आँखों में मोहब्बत बयाँ हो,

न कोई फासला, ना ही कोई दूरियों की जगह हो,

चलो चले ऐसी जगह,

जहाँ कोई नहीं हमारे सिवा हो,

जहाँ हवाएं भी हमारे रंग से सना हो, और

हर मौसम में हमारा प्यार सबसे जवान हो,

नजरे कहे जुबां चुप रहे,
आँखों आँखों में मोहब्बत बयाँ हो,


मांग सितारों से भर दूंगा

प्रिये, तुम कदम बढ़ाना , सारे कांटे मैं सह लूँगा,
अंग तुम्हारे सारी खुशियाँ, मांग सितारों से भर दूंगा
तकलीफे और बेरुखी ये तेरा श्रृंगार नहीं,
हर तकलीफों की राहों में, संग तुम्हारे चलता रहूँगा,
जब भी दर्द तेरी आँहों में आए,
अपनी खुशियों से भरता रहूँगा,
जब कभी अँधेरा हो जाए, मुझे आवाज़ देना,
रात भर चिराग बन जलता रहूँगा,

प्रिये, तुम कदम बढ़ाना , सारे कांटे मैं सह लूँगा,
अंग तुम्हारे सारी खुशियाँ, मांग सितारों से भर दूंगा