आँखों आँखों में मोहब्बत बयाँ हो
कभी मायूसी लगती है, कभी तन्हाई लगती है,
तेरे बिन जिंदगी भी बेवफाई लगती है,
रुक रुक कर बहना, कभी घनघोर बरसना
अपनी आँखे भी अब तो परायी लगती है,
तपते जलते राहों में, कदम कदम खिसकना,
सजा - ऐ - इश्क, अब ताउम्र बे रिहाई लगती है,
बोझिल सी आँखे और चुभता खालीपन,
सांसे है रूकती रूकती, हर एक मोड़ रुसवाई लगती है,
"गोविन्द" ऐतबार ही किया था और कुछ नहीं,
फ़िर आज मेरी वफ़ा क्यों, दुहाई लगती है.

