अंतर्भावना
मैं तुम्हे अपने रुमाल पे फूलो की तरह लपेट के रखना चाहता हूँ जैसे किसी मंदिर में पूजा के फूल दिए जाते है आँचल के कोने में बांधने के लिए, जो हमारे जीवन में एक आशीर्वाद की तरह साथ होता है, और ऐसा करके मैं तुम्हे आजीवन आशीर्वाद की तरह पाना चाहता हूँ, मेरा साथ दोगी न ?
--- गोविन्द शर्मा
लेबल: अंतर्भावना
