मेरे नैन को तेरा इंतज़ार है


मेरे नैन को तेरा इंतज़ार है
पूरब में सूर्य उगने को करार है
पर मेरे नैन को तेरा इंतज़ार है
मधुर वाणी की अभिलाषा में
तन और आंख थके हुए जाते है
पथ झांकती मेरी निगाह
पगडण्डी पर फूल दीप जलाते है
ये साँझ भी हंसती मुझपे, कितना बेकरार है
मेरे नैन को तेरा इंतज़ार है
अब फूल भी कंटीला लगता है
हवाएं भी शुष्क हुए जाती है
तेरे नाम स्पर्श स्वंदन मेरा मन बहलाती है
अब सोने की चाह रहती, सपनो में जो तुम्हे पाना है
समय काल चक्र बड़ा है,
धैर्य बिखरती जाती है
ये दरिया भी रोती मुझपे, कितना बेकरार है
मेरे नैन को तेरा इंतज़ार है..
पूरब में सूर्य उगने को करार है
पर मेरे नैन को तेरा इंतज़ार है
मधुर वाणी की अभिलाषा में
तन और आंख थके हुए जाते है
पथ झांकती मेरी निगाह
पगडण्डी पर फूल दीप जलाते है
ये साँझ भी हंसती मुझपे, कितना बेकरार है
मेरे नैन को तेरा इंतज़ार है
अब फूल भी कंटीला लगता है
हवाएं भी शुष्क हुए जाती है
तेरे नाम स्पर्श स्वंदन मेरा मन बहलाती है
अब सोने की चाह रहती, सपनो में जो तुम्हे पाना है
समय काल चक्र बड़ा है,
धैर्य बिखरती जाती है
ये दरिया भी रोती मुझपे, कितना बेकरार है
मेरे नैन को तेरा इंतज़ार है..

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