शुक्रवार, 15 मई 2009

मुझे न रुलाना बालम

मुझे न रुलाना बालम

तेरे राह पे दीप जलाने दो मुझको
मन्दिर में मन्नत मानाने दो मुझकों
मेरे इंतज़ार को इतना न आजमाओ
अब तो अपने होंठ पे मेरा नाम लाओ
ये तीखा तीखा इंतज़ार और तड़प का आलम,
मुझे न रुलाना न बालम

मिटा लो आँख का अँधियारा
अपना लो मेरा उजियारा
जन्मो के अरमान… आज तुमसे से पुरी होगी
तेरे प्रेम की डोर मुझे से जुड़ी होगी
माना लायक नहीं हूँ मैं तेरे…
पर प्यार की सेज… सजाया है तेरे लिए
ये काली काली रात, और बेबसी का आलम
मैं बहुत रोया, मुझे न रुलाना बालम

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