रविवार, 31 मई 2009

परिचय

अश्रु का रिश्ता मुझसे बहुत पुराना,
नहीं समझ पाता मुझको जाहिल जमाना
चाहो तो कभी आजमा के देख लेना
रूह तक तुम्हारी कर देगा, ये गोविन्द बेगाना

कभी रेत पे अपना नाम लिखता हूँ,
कभी अपने नाम से उसका नाम जोड़ता हूँ
उसको तो ख़बर ही नहीं, जिंदगी कैसे कट रही है,
वो दिन मिलन के समीप ही हैं, बस इंतज़ार करता हूँ.

मैं तो कोई फ़रिश्ता नहीं, की सारी तकलीफे को हार लूँ
पर कोशिश येही रहती है, सबकी खुशियों के लिए जीवन वार दूँ.

मंगलवार, 19 मई 2009

ऐ , मेरे जीवन के साथी


ऐ , मेरे जीवन के साथी

अक्सर बैठ यही सोचता हूँ
करके याद अक्सर तुम्हारी
क्या तुम्हे भी आती होगी
इसी तरह से याद हमारी

ऐ, मेरे जीवन के साथी

रोज रात को सोते वक्त
एक झलक हथेली देखता हूँ,
तेरा चेहरा स्पष्ट दीखता
कानो से आभाष सुनता हूँ
क्या मेरा भी एहसास तुम्हे है
देखती हो सपने हमारी

ऐ, मेरे जीवन के साथी

अब हर रात मुझे अधजगा लगता है

chhan भंगुर निशा का बहार
फासला काफी कठिन लगता है
कब आए मिलन का, त्यौहार
सहसा जाग ये ही सोचता हूँ
क्या उड़ती है नींद तुम्हारी

ऐ, मेरे जीवन के साथी

सोमवार, 18 मई 2009

जीवन बस समर्पण तुझको

पहले शौकिया तौर पे लिखता था.. पर अब लिखना जरुरत है.. वो तो अभी पास नहीं.. पर उसकी तस्वीर है… अभी मोहब्बत तो नहीं पर मोहब्बत की लकीर है.. बस येही ख्याल दिल को सताया.. हाथो में कलम आया…. और कुछ लिखा..जिसे प्रस्तुत कर रहा हूँ।

जीवन बस समर्पण तुझको
भूल चूका हूँ दर्द पुराना
जीवन प्रफुल्लित, चाह तुम्हारा
अपने पर में अब नाज मुझे है
कहाँ तक ये बात सही है
अपने हाल पे बिस्वास नहीं मुझको
जीवन बस समर्पण तुझको

जब जब तुम सपनो में आये
मैंने अपने गीत बनाये
मेरे गीत तुमको ही समर्पण
स्पर्श तुम्हारा बस प् जाऊं
क्या मेरे गीत पे नाज नहीं तुझको
जीवन बस समर्पण तुझको

सोचा करता बैठ अकेले
तेरी छवि बस छलकती है
तुझको देखने की इच्छा में
अश्क मेरे नैन धोती है
में भी एक मानव ही हूँ
अब और नहीं सतायो मुझको
जीवन बस समर्पण तुझको

शुक्रवार, 15 मई 2009

मुझे न रुलाना बालम

मुझे न रुलाना बालम

तेरे राह पे दीप जलाने दो मुझको
मन्दिर में मन्नत मानाने दो मुझकों
मेरे इंतज़ार को इतना न आजमाओ
अब तो अपने होंठ पे मेरा नाम लाओ
ये तीखा तीखा इंतज़ार और तड़प का आलम,
मुझे न रुलाना न बालम

मिटा लो आँख का अँधियारा
अपना लो मेरा उजियारा
जन्मो के अरमान… आज तुमसे से पुरी होगी
तेरे प्रेम की डोर मुझे से जुड़ी होगी
माना लायक नहीं हूँ मैं तेरे…
पर प्यार की सेज… सजाया है तेरे लिए
ये काली काली रात, और बेबसी का आलम
मैं बहुत रोया, मुझे न रुलाना बालम

मेरे नैन को तेरा इंतज़ार है





























मेरे नैन को तेरा इंतज़ार है

पूरब में सूर्य उगने को करार है
पर मेरे नैन को तेरा इंतज़ार है
मधुर वाणी की अभिलाषा में
तन और आंख थके हुए जाते है
पथ झांकती मेरी निगाह
पगडण्डी पर फूल दीप जलाते है
ये साँझ भी हंसती मुझपे, कितना बेकरार है
मेरे नैन को तेरा इंतज़ार है

अब फूल भी कंटीला लगता है
हवाएं भी शुष्क हुए जाती है
तेरे नाम स्पर्श स्वंदन मेरा मन बहलाती है
अब सोने की चाह रहती, सपनो में जो तुम्हे पाना है
समय काल चक्र बड़ा है,
धैर्य बिखरती जाती है
ये दरिया भी रोती मुझपे, कितना बेकरार है
मेरे नैन को तेरा इंतज़ार है..

मंगलवार, 12 मई 2009

तू कोई और नहीं, मेरा अभिमान है

तू कोई और नहीं, मेरा अभिमान है

मुख पर ढँक लेती हो आँचल
जैसे डूब रहा हो, शाम का बदल
या दिन भर उड़कर थकी कोयल…
सो जाती है पंख समेटे
मेरे चित्त से तेरे मन तक जो पहुंचे, मेरा गान है
तू कोई और नहीं, मेरा अभिमान है


सूर्य की किरने साँझ में जैसे लहराए
मिसरी की आवाज़ सा मीठा कोई गीत सुनाये
प्रेम रस से जैसे धुल के , खिलते तुम्हारे खुले बाल
अमृत के पवन द्रव से धुले हुए गाल
मेरे पूजन आराधन में, बस तेरा अरमान है
तू कोई और नहीं, मेरा अभिमान है

बच्चो की जिद्द सा तेरा मन
पवन, चितवन तेरा तन
तुम क्या जानो. घर का आँगन सुना है
कर लेने दो याद, तुही मेरा सम्मान है
तू कोई और नहीं मेरा अभिमान है

शुक्रवार, 8 मई 2009


कल रात तुम्हे सपने में देखा

आँख लगी और मैं, खो गया
झील पार कोई आगाज़ था,
थोड़ा अनजान.. थोड़ा पहचान था
धुंद थी कुछ देख न पाया
पर.. हवाओ ने पहचान कराया
हमसफ़र नाम था, सपने में नियति का चेहरा देखा
कल रात तुम्हे सपने में देखा


पास गया, तुम वही खड़ी थी
कुछ सोच और कुछ देख रही थी
रेत में लिखा था नाम, शायद मेरा था
तुम्हारी निगाहें मुझको देखे ,
मेरे नैन भी देखे तुमको,
बात छुपी थी, बताना था मुझे,
साँस तुम्हारी है, जताना था मुझे
हाथ बढाया… स्पर्श करने को..
आँख खुली.. सपने की नदी को थमते देखा,
कल रात तुम्हे सपने में देखा

लेबल:

गुरुवार, 7 मई 2009

काश सनम तुम मेरी होती ।

मैं बैठा भीड़ में अकेला हो कर
प्रिये, प्रीत लिए मन में तेरी
चिर, मन, प्रीत कब समझोगी
आंखों की भाषा मेरी,
मेरी रातों में दीपक बन कर जलती
काश सनम तुम मेरी होती


हर झरोके में खुशबू तेरी,
हर लम्हा तेरी याद है,
क्या कहूँ..की मेरे माथे में
बस तन्हाई की रेखा है..
तनहा सागर,, तनहा आकाश, मेरी साथ हमेशा होती
काश सनम तुम मेरी होती

एक बार भी तुमसे कह न पाया
पर दिल से बस तुमको चाहा
जब नींद नहीं थी आंखों में
और रातों में कोई ख्वाब न था,
उन तन्हाई की रातों में,
काश तुम मेरे पास होती,
काश सनम तुम मेरी होती…..

लेबल:

रविवार, 3 मई 2009


तुम्हारा इंतज़ार इतना प्यारा है, अगर तुम आते तो क्या होता !!

नभ चमकते है तारो से, आँखों में सपने सजने लगे
धुंद फैलता अंगारों से, लौटने की आस बहने लगे
हवाओ की रुख भी तेरी कहानी सुनाती है..
वक्त पंखो का पर लगाये. कहाँ पहुँचा होता..
तुम्हारा इंतज़ार इतना प्यारा है, अगर तुम आते तो क्या होता !!


अनगिनत राही गए, हर में तुमको ढूँढता हूँ,
ह्रदय को सुख करने वाले, तेरे स्वर ढूँढता हूँ,
जग में मिलन की नदिया बहती, पर मैं अब भी प्यासा हूँ,
तेरे नाम स्पर्श स्वंदन, मेरा आधार और क्या होता
तुम्हारा इंतज़ार इतना प्यारा है, अगर तुम आते तो क्या होता !!

अब और कठिन है कौन्सना किसी को, एकांत जुदाई का सत्य बड़ा है
तेरी राह तकते मेरे नैन. राहों पे अडिग खड़ा है,
सांसें घूम - घूम कर, फ़िर – फ़िर कर, इंतज़ार के पल गिनती है,
अपनी आहों में भर कर प्रिये, प्यार जताते तो क्या होता
तुम्हारा इंतज़ार इतना प्यारा है, अगर तुम आते तो क्या होता !!

लेबल: