परिचय
अश्रु का रिश्ता मुझसे बहुत पुराना,
नहीं समझ पाता मुझको जाहिल जमाना
चाहो तो कभी आजमा के देख लेना
रूह तक तुम्हारी कर देगा, ये गोविन्द बेगाना
कभी रेत पे अपना नाम लिखता हूँ,
कभी अपने नाम से उसका नाम जोड़ता हूँ
उसको तो ख़बर ही नहीं, जिंदगी कैसे कट रही है,
वो दिन मिलन के समीप ही हैं, बस इंतज़ार करता हूँ.
मैं तो कोई फ़रिश्ता नहीं, की सारी तकलीफे को हार लूँ
पर कोशिश येही रहती है, सबकी खुशियों के लिए जीवन वार दूँ.




